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पाताल में धंसता हुआ शिवलिंग

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पाताल में धंसता हुआ शिवलिंग हिमालय की गोद में बसे एक एतिहासिक गांव में एक मंदिर में स्थापित शिवलिंग पाताल में धंसता जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि पाताल में उस दिन यह शिवलिंग...

स्वदेशी ज्ञान : अब नहीं टपकेगी आपकी छत, सिर्फ 50 रुपैये के खर्चे में होगा इसका रामबाण इलाज

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स्वदेशी ज्ञान अब नहीं टपकेगी आपकी छत, सिर्फ 50 रुपैये के खर्चे में होगा इसका रामबाण इलाज बरसात में छत टपकाना एक आम बात है और ये स्थिति कभी कभी इतनी भयंकर होती है के पूरी की पूर...

आज का विचार

समस्त मानवीय गलतियाँ अहंकार से उत्पन्न होती हैं बल, बुद्धि, विद्या, जन, बन, रूप-रंग किसी भी क्षेत्र में क्यों न हो, अभिमान मनुष्य को मिटा देता है। विद्या की अभिमानी विद्योतमा ...

बाबाधाम कोसमनारा की सच्ची कहानी

*बाबाधाम कोसमनारा की सच्ची कहानी* हिन्दू शास्त्रों में ऋषि मुनियों की 15-20 साल जंगलो,पहाड़ों और कंदराओं में कठोर तपस्या का वर्णन मिलता है। साधारण तौर पर इसे लोग इसे काल्पनिक क...

एकादशी व्रत विधि

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एकादशी व्रत विधि दशमी की रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें तथा भोग विलास से भी दूर रहें । प्रात: एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें; नींबू, जामुन या आम के प...

अवकाश के प्रकार

*सभी राजकीय कार्मिक इसे किसी कागज़ पे नोट कर ले। छुट्टी एवं उसके नियम :-* *1 - अर्जित अवकाश :-* यह अवकाश प्रत्येक वर्ष 31 दिन के देय है। 1 जनवरी को 16 दिन तथा 1 जुलाई को 15 दिन दो किस्तों में देय है।  यह अवकाश पूरे सेवा काल में 300 दिनों तक जमा किया जा सकता है। भारत में लगातार 120 दिन की तथा भारत से बाहर 180 दिनों की छुट्टी देय है। _*मूल नि.- 81-बी(1)*_ *2 - चिकित्सा अवकाश :-* यह अवकाश स्थाई कार्मिकों को पूरे सेवा काल में 12 माह तक पूरे वेतन पर तथा 6 माह तक अर्ध वेतन पर देय है। _*मूल नि.-81-बी(3)*_ *3 - निजी कार्य पर, अर्ध वेतन पर अवकाश :-* स्थाई कार्मिकों को यह अवकाश पूरे सेवा काल में 365 दिनों तक अर्ध वेतन पर देय है। यह अवकाश भी अर्जित अवकाश की तरह 1 जनवरी को 16 दिन तथा 1 जुलाई को 15 दिन कर्मचारी के खाते में जमा हो जाता है तथा यह अवकाश भी कर्मचारी के खाते में पुरा यानी 365 दिनों तक जमा किया जा सकता है। _*मूल नि.-81-बी(3)*_ *4 - असाधारण अवकाश ( बिना वेतन का ) :-* यह अवकाश अन्य अवकाश के साथ मिलाकार अथवा बिना वेतन का अवकाश अलग से 5 वर्ष तक का देय है। 5 वर्ष से अधिक श...

रामायण vs श्रीमदभागवत

" दक्षिण का एक ग्रन्थ " क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो रामायण की कथा पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे। जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को ‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और विपरीत (उल्टा) क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक। पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव (राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है ~ "राघवयादवीयम।" उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः । रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥ अर्थातः मैं उन भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम करता हूं, जो जिनके ह्रदय में सीताजी रहती है तथा जिन्होंने अपनी पत्नी सीता के लिए सहया...