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बिच्छु काटने के उपचार

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बिच्छू काटने पर तुरंत घरेलू उपचार                   बिच्छू के काटने पर फिटकरी का प्रयोग इस रामबाण साबित होता है।  फिटकरी को किसी साफ पत्थर पर थोड़ा सा पानी डाल कर इसे घिसें। फिर जहां पर बिच्छु ने काटा  हो वहां पर इस फिटकरी का पेस्ट लगाकर आग से थोड़ा सेंके। कैसा भी जहरीला बिच्छु का काटा  क्यों न हो इस फिटकरी के इस्तमाल से जहर सिर्फ 2 ही मिनट में असर उतर जाता है। फिटकरी को  चिमटी से पकड़ कर थोडा सा गर्म कर लें जैसे ही फिटकरी पिघलने लगे तो फिटकरी को बिच्छू के  काटे हुये जगह पर लगा दे फिटकरी तुरन्त वहां चिपक जायेंगी एंव पूरा जहर चूस कर अपने आप  उतर जायेंगी  इमली के बीज को साफ पत्थर पर घिसे घिसते-घिसते अन्दर का सफेद भाग निकल आयेंगा तो उसे  भी बिच्छु के काटने के जहग पर लगा दें तो यह चिपक जायेगा जैसे ही यह नीचे गिरे तो दूसरा बीज घिस कर लगाइयें इस प्रकार बिच्छु का जहर उतरने लगता हैं। बिच्छु के काटने पर माचिस की पांच  से छः तीलियाँ का मसाला को उतारकर पानी में घिसकर बिच्छु के काटने वाले जहग पर लगाने ...

शाकाहारी बनों

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*कंद-मूल खाने वालों से* मांसाहारी डरते थे।। *पोरस जैसे शूर-वीर को* नमन 'सिकंदर' करते थे॥ *चौदह वर्षों तक खूंखारी* वन में जिसका धाम था।। *मन-मन्दिर में बसने वाला* शाकाहारी *राम* था।। *चाहते तो खा सकते थे वो* मांस पशु के ढेरो में।। लेकिन उनको प्यार मिला ' *शबरी' के जूठे बेरो में*॥ *चक्र सुदर्शन धारी थे* *गोवर्धन पर भारी थे*॥ *मुरली से वश करने वाले* *गिरधर' शाकाहारी थे*॥ *पर-सेवा, पर-प्रेम का परचम* चोटी पर फहराया था।। *निर्धन की कुटिया में जाकर* जिसने मान बढाया था॥ *सपने जिसने देखे थे* मानवता के विस्तार के।। *नानक जैसे महा-संत थे* वाचक शाकाहार के॥ *उठो जरा तुम पढ़ कर देखो* गौरवमय इतिहास को।। *आदम से आदी तक फैले* इस नीले आकाश को॥ *दया की आँखे खोल देख लो* पशु के करुण क्रंदन को।। *इंसानों का जिस्म बना है* शाकाहारी भोजन को॥ *अंग लाश के खा जाए* क्या फ़िर भी वो इंसान है? *पेट तुम्हारा मुर्दाघर है* या कोई कब्रिस्तान है? *आँखे कितना रोती हैं जब* उंगली अपनी जलती है *सोचो उस तड़पन की हद*               ...

Today's voice

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आज का संदेश-  ************** आज का भारतीय समाज एवं प्रचीन भारतीय समाज की तुलना करो तो मन में एक कसक सी उठती है | आज एक बच्चे से लेकर 80 वर्ष का बुज़ुर्ग आधुनिकता की अंधी दौध में लगा हुआ है आज हम पश्चिमी हवाओं के झंझावत में फंसे हुए है | पश्चिमी देशो ने हमे बरगलाया है और हम इतने मुर्ख की उससे प्रभावित होकर इस दिशा की और भागे जा रहे है जिसका कोई अंत नही है | वास्तव में देखा जाए तो हमारा स्वयं का कोई विवेक नही है हम जैसा देख लेते है वैसा ही बनने का प्रयत्न करने लगते है निश्चित रूप से यह हमारी संस्कृति के ह्रास का समय है जिस तेज गति से पाश्चात्य संस्कृति का चलन बढ़ रहा है, उससे लगता है कि वह समय दूर नहीं, जब हम पाश्चात्य संस्‍कृति के गुलाम बन जायेंगे और अपनी पवित्र पावन भारतीय संस्कृति, भारतीय परम्परा सम्पूर्ण रूप से विलुप्त हो जायेगी, गुमनामी के  अंधेरों में खो जायेगी। आज मनोरंजन के नाम पर बुद्धू बॉक्स से केवल अश्लीलता और फूहड़पंन का ही प्रसारण हो रहा है हमें मनोरंजन के नाम पर क्या दिया जा रहा है मारधाड़, खुन खराबा, पर फिल्माए गए दृश्य मनोरंजन के नाम पर मानवीय ग...

चाणक्य के अमर वाक्य

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चाणक्य के 15 अमर वाक्य 1)दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है। 2)हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है, यह कड़वा सच है। 3)अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो। छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो। सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो। आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है।" 4)दूसरों की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी। 5)किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं। 6)अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे दंश भले ही न हो पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए। 7)कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो... मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ? इसका क्या परिणाम होगा ? क्या मैं सफल रहूँगा? 8)भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये इस पर हमला कर दो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो। 9)काम का निष्पादन करो, परिणाम से मत डरो। 10)सुगंध का प्रसार हवा के रुख का म...

Cg Comedy

छ ग - हास्य रचना सावन म करेला फूटे            गरमी म पसीना देहाती ल कथें सुन्दरी             शहर के हसीना | शहर के हसीना संगी            मुश्किल कर दिस जीना देख के जवान टुरा मन             शुरू कर दिन पीना | जब ले लगे फागुन महीना                 टुरी मुचमुचात हे मोबाइल म रात रात भर            आनी बानी गोठियात हे | पढाई म मन न ई लागय       कापी पुस्तक तिरियात हे दाई ददा के कहे नी मानय               अब्बड़ सत्ती जात हे | का होगे जमाना ल संगी             ए ही समझ न ई आत हे मुंह म कपड़ा बांध के टुरी            गाड़ी म कहाँ  जात हे |

शांति की तलास

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अगर शांति चाहिए तो इससे दोस्ती कीजिए… यदि आप शांति की तलाश में हैं तो अपनी दोस्ती मौन से भी कर ली जाए। पुरानी कहावत है मौन के वृक्ष पर शांति के फल लगते हैं। मौन और चुप्पी में फर्क है। चुप्पी बाहर होती है, मौन भीतर घटता है। चुप्पी यानी म्यूटनेस जो एक मजबूरी है। लेकिन मौन यानी साइलेंस जो एक मस्ती है। इन दोनों ही बातों का संबंध शब्दों से है। दोनों ही स्थितियों में हम अपने शब्द बचाते हैं लेकिन फर्क यह है कि चुप्पी में बचाए हुए शब्द भीतर ही भीतर खर्च कर दिए जाते हैं। चुप्पी को यूं भी समझा जा सकता है कि पति-पत्नी में खटपट हो तो यह तय हो जाता है कि एक-दूसरे से बात नहीं करेंगे, लेकिन दूसरे बहुत से माध्यम से बात की जाती है। भीतर ही भीतर एक-दूसरे से सवाल खड़े किए जाते हैं और उत्तर भी दे दिए जाते हैं। यह चुप्पी है। इसमें इतने शब्द भीतर उछाल दिए गए कि उनG शब्दों ने बेचैनी को जन्म दे दिया, अशांति को पैदा कर दिया। दबाए गए ये शब्द बीमारी बनकर उभरते हैं। इससे तो अच्छा है शब्दों को बाहर निकाल ही दिया जाए। मौन यानी भीतर भी बात नहीं करना, थोड़ी देर खुद से भी खामोश हो जाना। मौन से बचाए हुए शब...

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*एक समय की बात है...* *एक सन्त* *प्रात: काल भ्रमण हेतु* *समुद्र के तट पर पहुँचे...* *समुद्र के तट पर* *उन्होने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सर रख कर सोया हुआ था.* *पास में शराब की खाली बोतल पड़ी हुई थी.* *सन्त बहुत दु:खी हुए.* *उन्होने विचार किया कि ये मनुष्य कितना तामसिक और विलासी है, जो प्रात:काल शराब सेवन करके स्त्री की गोद में सर रख कर प्रेमालाप कर रहा है.* *थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ, बचाओ की आवाज आई,* *सन्त ने देखा एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा है,* *मगर स्वयं तैरना नहीं आने के कारण सन्त देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे.* *स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतु पानी में कूद गया.* *थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को बचा लिया और किनारे ले आया.* *सन्त विचार में पड़ गए की इस व्यक्ति को बुरा कहें या भला.* *वो उसके पास गए और बोले भाई तुम कौन हो, और यहाँ क्या कर रहे हो...?* *उस व्यक्ति ने उत्तर दिया : —* *मैं एक मछुआरा हूँ* *मछली मारने का काम करता हूँ.आज कई दिनों बाद समुद्र से मछली पकड़ कर प्रात: जल्दी...