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Cg Comedy

छ ग - हास्य रचना सावन म करेला फूटे            गरमी म पसीना देहाती ल कथें सुन्दरी             शहर के हसीना | शहर के हसीना संगी            मुश्किल कर दिस जीना देख के जवान टुरा मन             शुरू कर दिन पीना | जब ले लगे फागुन महीना                 टुरी मुचमुचात हे मोबाइल म रात रात भर            आनी बानी गोठियात हे | पढाई म मन न ई लागय       कापी पुस्तक तिरियात हे दाई ददा के कहे नी मानय               अब्बड़ सत्ती जात हे | का होगे जमाना ल संगी             ए ही समझ न ई आत हे मुंह म कपड़ा बांध के टुरी            गाड़ी म कहाँ  जात हे |

शांति की तलास

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अगर शांति चाहिए तो इससे दोस्ती कीजिए… यदि आप शांति की तलाश में हैं तो अपनी दोस्ती मौन से भी कर ली जाए। पुरानी कहावत है मौन के वृक्ष पर शांति के फल लगते हैं। मौन और चुप्पी में फर्क है। चुप्पी बाहर होती है, मौन भीतर घटता है। चुप्पी यानी म्यूटनेस जो एक मजबूरी है। लेकिन मौन यानी साइलेंस जो एक मस्ती है। इन दोनों ही बातों का संबंध शब्दों से है। दोनों ही स्थितियों में हम अपने शब्द बचाते हैं लेकिन फर्क यह है कि चुप्पी में बचाए हुए शब्द भीतर ही भीतर खर्च कर दिए जाते हैं। चुप्पी को यूं भी समझा जा सकता है कि पति-पत्नी में खटपट हो तो यह तय हो जाता है कि एक-दूसरे से बात नहीं करेंगे, लेकिन दूसरे बहुत से माध्यम से बात की जाती है। भीतर ही भीतर एक-दूसरे से सवाल खड़े किए जाते हैं और उत्तर भी दे दिए जाते हैं। यह चुप्पी है। इसमें इतने शब्द भीतर उछाल दिए गए कि उनG शब्दों ने बेचैनी को जन्म दे दिया, अशांति को पैदा कर दिया। दबाए गए ये शब्द बीमारी बनकर उभरते हैं। इससे तो अच्छा है शब्दों को बाहर निकाल ही दिया जाए। मौन यानी भीतर भी बात नहीं करना, थोड़ी देर खुद से भी खामोश हो जाना। मौन से बचाए हुए शब...

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*एक समय की बात है...* *एक सन्त* *प्रात: काल भ्रमण हेतु* *समुद्र के तट पर पहुँचे...* *समुद्र के तट पर* *उन्होने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सर रख कर सोया हुआ था.* *पास में शराब की खाली बोतल पड़ी हुई थी.* *सन्त बहुत दु:खी हुए.* *उन्होने विचार किया कि ये मनुष्य कितना तामसिक और विलासी है, जो प्रात:काल शराब सेवन करके स्त्री की गोद में सर रख कर प्रेमालाप कर रहा है.* *थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ, बचाओ की आवाज आई,* *सन्त ने देखा एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा है,* *मगर स्वयं तैरना नहीं आने के कारण सन्त देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे.* *स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतु पानी में कूद गया.* *थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को बचा लिया और किनारे ले आया.* *सन्त विचार में पड़ गए की इस व्यक्ति को बुरा कहें या भला.* *वो उसके पास गए और बोले भाई तुम कौन हो, और यहाँ क्या कर रहे हो...?* *उस व्यक्ति ने उत्तर दिया : —* *मैं एक मछुआरा हूँ* *मछली मारने का काम करता हूँ.आज कई दिनों बाद समुद्र से मछली पकड़ कर प्रात: जल्दी...

Histry of holi

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*होलिका दहन मुहूर्त* १२ मार्च, रविवार, २०१७. १८:२१:५४ से २०:२५:३० तक अवधि :  २ घंटे ३ मिनट *भद्रा पुँछा* : ०४:२१:३९ से ०५:३३:४७ तक *भद्रा मुखा* : ०५:३३:४७ से ०७:३४:०० तक *पूर्णिमा तिथि आरंभ*- २०:२३  , ११ मार्च *पूर्णिमा तिथि समाप्त*- २०:२३ ,१२ मार्च            होलिका दहन, होली त्यौहार का पहला दिन, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंगों से खेलने की परंपरा है जिसे धुलेंडी, धुलंडी और धूलि आदि नामों से भी जाना जाता है। होली बुराई पर अच्छाई की विजय के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।         *होलिका दहन का शास्त्रोक्त नियम:*        फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक होलाष्टक माना जाता है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। पूर्णिमा के दिन होलिका-दहन किया जाता है। इसके लिए मुख्यतः दो नियम ध्यान में रखने चाहिए..... १.   पहला, उस दिन “भद्रा” न हो। भद्रा का ही एक दूसरा नाम विष्टि करण भी है, जो कि 11 करणों में से एक है। एक करण तिथि के आधे भाग के बराबर होता है। २. ...

Holika dahan (होलिका दहन) 2017

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होलिका दहन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा (12 मार्च, रविवार) को किए गए उपाय बहुत ही जल्दी शुभ फल प्रदान करते हैं। आज हम आपको होली पर किए जाने वाले कुछ साधारण उपाय बता रहे हैं। ये उपाय इस प्रकार हैं- धन लाभ का उपाय होलिका दहन से पहले जब गड्ढा खोदें, तो सबसे पहले उसमें थोड़ी चांदी, पीतल व लोहा दबा दें। यह तीनों धातु सिर्फ इतनी मात्रा में होनी चाहिए, जिससे आपकी मध्यमा उंगली के नाप का छल्ला बन सके। इसके बाद विधि-विधान से दाण्डा रोपे। जब आप होलिका पूजन को जाएं, तो पान के एक पत्ते पर कपूर, थोड़ी-सी हवन सामग्री, शुद्ध घी में डुबोया लौंग का जोड़ा तथा बताशे रखें। दूसरे पान के पत्ते से उस पत्ते को ढक दें और 7 बार होलिका की परिक्रमा करते हुए ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। परिक्रमा समाप्त होने पर सारी सामग्री होलिका में अर्पित कर दें तथा पूजन के बाद प्रणाम करके घर वापस आ जाएं। अगले दिन पान के पत्ते वाली सारी नई सामग्री ले जाकर पुन: यही क्रिया करें। जो धातुएं आपने दबाई हैं, उनको निकाल लाएं। फिर किसी सुनार से तीनों धातुओं को मिलाकर अपनी मध्यमा उंगली के माप क...

Holashtak (होलाष्टक)

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                                         " होलाष्टक " *5 मार्च दिन रविवार से आरंभ* शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन के आठ दिन पूर्व होलाष्टक लग जाता है। होली की सूचना होलाष्टक से प्राप्त होती है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर होलिका दहन तक के समय को धर्मशास्त्रों में होलाष्टक का नाम दिया गया है। इसके अनुसार होलाष्टक लगने से होली तक कोई भी शुभ संस्कार संपन्न नहीं किए जाते। *16 संस्कारों पर रोक* होली के एक सप्ताह पहले शुरू होकर आठ दिन तक माने जाने वाले इस होलाष्टक काल को अशुभ मानने की मान्यता के कारण आठ दिन तक कोई भी शुभ कार्य को करने की मनाही है, इसलिए शास्त्रीय मान्यता के अनुसार 16 संस्कारों में से कोई भी संस्कार नहीं किए जाते है। 16 संस्कार के अलावा अन्य जो भी आवश्यक कार्य होते हैं वे किए जा सकते है। सोना-चांदी खरीदना या इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, कार, बाइक खरीदे जा सकते हैं, ये 16 संस्कारों के अंतर्गत नहीं आते बल्कि घर-परिवार की जरूरी चीजें हैं। *ये हैं 16 संस्कार*...

तिलक लगाने के फायदे

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तिलक लगाने के फायदे किसी के माथे पर तिलक लगा देखकर मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर टीका लगाने से फायदा क्या है? क्या यह महज दूसरों के सामने दिखावे के मकसद से किया जाता है या फिर तिलक धारण का कुछ वैज्ञानिक आधार भी है? दरअसल, टीका लगाने के पीछे आध्यात्म‍िक भावना के साथ-साथ दूसरे तरह के लाभ की कामना भी होती है l आइये जानते हैं तिलक लगाने के क्या फायदे होते हैं l आम तौर पर चंदन, कुमकुम, मिट्टी, हल्दी, भस्म आदि का तिलक लगाने का विधान है. अगर कोई तिलक लगाने का लाभ तो लेना चाहता है, पर दूसरों को यह दिखाना नहीं चाहता, तो शास्त्रों में इसका भी उपाय बताया गया है. कहा गया है कि ऐसी स्थ‍िति में ललाट पर जल से तिलक लगा लेना चाहिए l इससे लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर कुछ लाभ बड़ी आसानी से मिल जाते हैं. आगे तिलक धारण करने के फायदों की चर्चा की गई है l 1. तिलक करने से व्यक्त‍ित्व प्रभावशाली हो जाता है. दरअसल, तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक असर होता है, क्योंकि इससे व्यक्त‍ि के आत्मविश्वास और आत्मबल में भरपूर इजाफा होता है l 2. ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है. लोग ...